Sunday, January 6, 2013

मानवता का बलात्कार

दरिन्दो ने सिर्फ मासूम का रेप नहीं किया..
रेप किया विश्वास का..
रेप किया पूरी पुरूष जात का..
रेप किया समाज का..
रेप किया इन्सानियत का..
रेप किया माँ की कोख का..
रेप किया संस्कृति का..
रेप किया उस भावना का,
जिसके कारण पड़ोस की बिटिया गोद मेँ खेल सकती थी,

अनजान को भी चाचा ताऊ भैया बोल सकती थी..
रेप किया उस विश्वास का जिसके कारण पुरूषो को संरक्षक मानती थी..
एक छोटी सी भद्दी सी बात कहुँगा मैँ,
मेरे सामने चाहे नग्न और अर्द्धनग्न युवती भी हो तो कुकर्म का ख्याल नहीँ आता दिल मेँ मेरे..
..और कुकर्मी को कपड़ो और उम्र से कोई फर्क नहीँ पड़ता उसके लिये पूरे कपड़ो वाली महिलाये भी उपभोग और कुचेष्टा के लायक दीखती है।
ध्यान रखे मैँ नग्नता का समर्थक नहीँ मगर बलात्कार के लिये नग्नता को जिम्मेदार नहीँ मानता।
क्योँकी माँस कितना भी लजिज हो शाकाहारी नहीँ खाता,
क्योंकी उसके दिमाग मेँ होता है की धर्मभ्रष्ट हो जायेगा।
या नहीँ खाना तो नहीँ खाना।
।।ये मेरी सोच है आपकी सोच मुझे पता नहीँ,
मैँ बस इतना जानता हुँ की कपड़ो के कारण मेरी मानसिक स्थिति कुकर्म की स्थिति तक विचलित नहीँ होती है।
साभार:- सन्नी कुमार तिवारी अविनाश

No comments:

Post a Comment

Popular Posts