Sunday, February 10, 2013

भारत का शिक्षा तंत्र और मैकाले

२ फरवरी 1835 को ब्रिटिश संसद में दिया लार्ड मैकाले का भाषण)
-"मैंने भारत की ओर-छोर की यात्राकी है पर मैंने एक भी आदमी ऐसा नहीं देखा जो भीख मांगता हो या चोर हो। मैंने इस मुल्क में अपार संपदा देखी है। उच्च उदात्त मूल्यों को देखा है। इन योग्यता मूल्यों वाले भारतीयोंको कोई कभी जीत नहीं सकता यह मैंमानता हूं
, तब तक; जब तक कि हम इस मुल्क की रीढ़ ही ना तोड़ दें, और भारत की रीढ़ है उसकी आध्यात्मिकऔर सांस्क्रतिक विरासत।इसलिए मैं यह प्रस्ताव करता हूंकि भारत की पुरानी शिक्षा व्यवस्था को हम बदल दें। उसकी संस्क्रति को बदलें ताकि हर भारतीय यह सोचे कि जो भी विदेशी है, वह बेहतर है। वे यह सोचने लगें कि अंग्रेजी भाषा महान है अन्य देशी भाषाओं से। इससे वे अपना सम्मान खो बैठेंगे। अपनी देशज जातीय परंपराओं को भूलने लगेंगे और फिर वे वैसे ही हो जाएंगे जैसा हम चाहते हैं, सचमुच एक आक्रांत एवं पराजित राष्ट्र।
जब तक किसी बच्चे को धर्म और संस्कृति की शिक्षा नहीं दी जाती तब तक क्या वो कभी इंसान बन सकता है? नहीं
हमारा शिक्षा तंत्र हमें यह सब नहीं सिखाता। होना चाहिये था अंग्रेजों के जाने के बाद हमारी जो प्राचीन परम्पराये और रीति रिवाज है उनमें छिपे विज्ञान पर अनुसंधान होने चाहिये थे ताकि उस ज्ञान का राष्ट्र हित में उपयोग किया जा सके हुआ क्या अंनुसंधान तो बहुत दूर की बात है उन परम्पराओं को अंधविश्वाश घोषित कर दिया गया।हमारा जो प्राचीन आयुर्वेद,ज्योतिष ज्ञान , नाडी ज्ञान , दादी-नानी के घरले उपचार ,....... ये सब कुछ लगभग लगभग नष्ट हो चुके है।हम तो इन्हे नष्ट कर रहे है और दूसरे देशों ने हमारे ज्ञान की बदौलत नई नई खोज करके अपने नाम से पैटेन्ट करा ली। हमारी सोच को 33% तक सीमित कर दिया जाता है 33% में भी ग्रेस ,सप्लीमेन्टरी, बैक पेपर .... आदि का सिस्टम होता है।
हमारा शिक्षा तंत्र एसा होना चाहिये जो किसी व्यक्ति को अपने आप में सक्षम बनाये उनमें एक राष्ट्र हित की भावना का संचार करे।लेकिन हमारा शिक्षा तंत्र ये कुछ नहीं सिखाता ।तम्बाकू और सिगरेट के पैकेट पर एक वार्निग लिखी रहती है। लाखो लोगो को हम तम्बाकू से होने वाले कैंसर से मरते देखते है। फिर भी बडे बड विद्वान लोग जिनमें इंजीनीयर,मैनेजर, स्नातन, कर्मचारी वर्ग.......इत्यादी तम्बाकू के पाउच के उपर लिखी चेतावनी तक नहीं पड सकते यह है हमारे शिक्षा तंत्र की हकीकत
अगर हमारे देश में एक छोटा सा काम हो जाये विद्यालयों में योग और घरेलु आयुर्वेद जिसमें तुलसी, नीम ,हल्दी, लौंग ... आदि का उपचार के रूप में उपयोग करने की कक्षायें आरम्भ की जायें तो लगभग 50%  से ज्यादा दवाईयों और अस्पतालों का खर्चा कम हो जायेगा।
हमारे स्कूलों में पासिंग मार्क्स 33% है जब आप उच्चा कक्षा में अध्यन करने जाओगे तो वो मांगेगे 60% मार्क्स।अब क्या करें हमको तो अपने बच्चे का एडमिशन कराना है फिर हम कोलेज एडमिनिस्ट्रेशन से विनती करेंगे।तब काँलेज वाले बोलेंगें आपको 5 लाख का डोनेशन देना पडेगा। कोई बोलेगा आपको 3 लाख डोनेशन देना पडेगा। आज कल यह डोनेशन का धन्धा प्राइमरी कक्षाऒं में भी होने लगा है। आप दिल्ली मुम्बई में जाकर देखिये स्कूल फीस अलग , गाडी की अलग, ट्यूशन की अलग और ना जाने क्या क्या फीस देनी पडती है।
भारत के शिक्षा तंत्र में एक बहुत बडी बीमारी है जिसका नाम है ट्यूशन । जो लोग ट्यूशन पडाते है उनकी कोशिश रहती है ज्यादा से ज्यादा स्टूडेन्ट उनके पास आये ट्यूशन पडने के लिये।उसके लिये वो विद्यार्थियों के मन में एक भावना बैठाते है कि उनको ट्यूशन पडना ही है बिना ट्यूशन के वो सीख ही नहीं सकते। कुछ अध्यापक क्या करते है जिन स्कूलों में वो पडाते है उसमें वो क्लास में एक फोर्मल्टी करते है पडाने कि वो स्टूडेन्ट्स को सिर्फ ट्यूशन में पडाते है।इस कन्डीशन में हमारी मजबूरी बन जाती है कि हम ट्यूशन पडे । एक तो हम शिक्षा का बोझ दूसरा यह ट्यूशन फीस का बोझ इन बोझों के तले हम दब जाते है। कभी कभी क्या होता है हमारे पास अच्छे अध्यापक नहीं होते उस स्थिति में हमें ट्यूशन करना पडता है। अच्छे अध्यापक क्यों नहीं क्योंकि उनमें योग्यता नहीं है उनमें योग्यता क्यों नहीं क्योंकि वो योग्यता से नौकरी नहीं लगे आरक्षण के बल पर नौकरी लगे।हमको क्या करना चाहिये जो आरक्षण नौकरियों में दिया गया है उसको हटा देना चाहिये। उसके स्थान पर शिक्षा में सुविधाऔं पर आरक्षाण देना चाहिये वो भी गरीबी के आधार पर जैसे गरीबों को निशुल्क किताबें देना, फीस माँफ करना, यूनीफार्म बनवाना ....... जो भी आरक्षन है यहीं तक होना चाहिये नौकरियों में नहीं।
ये जो कुचक्र बना हुआ है स्कूल ट्यूशन फिर एक और ट्यूशन इसमें एक छोटा बच्चा फस जाता है और जो सैल्फ स्टडी के जो समय उसे मिलना चाहिये था वो नहीं मिल माता।
इसके अलावा ऒर बहुत सी कमियाँ है। हमारे शिक्षा तंत्र में  आजकल एक और नई बात देखने को मिल रही है बच्चों को पहली कक्षा से इंगलिश मीडियम स्कूलों में भेजने लग गये है। बच्चे को कुछ समझ नहिं आता टीचर क्या बोल रही है वो उधर चुपचाप बैठ कर इधर उधर देखकर अपना समय निकाल रहा है और घर पर माँ बाप खुश हो रहे है कि हमारा बेटा इंग्लिश मीडियम में पढ रहा है।
जैसा की विवेकानन्द जी कहते थे हमें ऎसा शिक्षा व्यवस्था चाहिये जो वयक्ति निर्माण के साथ साथ राष्ट्र निर्माण में सहायक हो। जापान एक छोटा सा देश है जो कि 1945 में परमाणु हमले के बाद लगभग लगभग नष्ट हो गया था । उसकी भौगोलिक परिस्थितियाँ भी भारत से बहुत खराब है। फिर भी वो आज तकनीकी के क्षेत्र में हमसे बहुत आगे निकल गया।
एक सपना मैकाले ने देखा था और एक सपना राजीव दीक्षित जी ने देखा था
जिस दिन लार्ड मैकाले का सपना पूरा और राजीव भाई का सपना ध्वस्त हो जाएगा, उस दिन देश पूरे तौर पर केवल 'इंडिया' रह जाएगा। हो सकता है, समय ज़्यादा लग जाए, लेकिन अगर भारतवर्ष को एक स्वाधीन राष्ट्र बनना है, तो इन दो सपनों के बीच कभी न कभी टक्कर होना निश्चित है।

Thursday, February 7, 2013

स्वदेशी वस्तुओं की सूची

सन 1947 में 1 रुपया 1 डालर के बराबर होता था जो वर्तमान में घटकर 55रुपये 1 डालर के बराबर हो गया है। भारत पर वित्त वर्ष 2011-12 के अंत में विदेशी ऋण मार्च 2011 के 305.9 अरब डॉलर की तुलना में 13 प्रतिशत अर्थात 39.9 अरब डॉलर बढकर 345.8 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। आजादी के 60 वर्ष बाद भी हमें खिलौने भी चीन के बने हुये प्रयोग करते है।
थोक के भाव इंजीनीयर पैदा करने वाले देश में.कैलकुलेटर, मैमोरी कार्ड , सिम कार्ड ...... जैसी छोटी छोटी वस्तऐं भी चीन से आयातित करनी पड रही है।
दैनिक रोजमर्रा की वस्तुओं साबुन, सैम्पू, क्रीम, तेल, जूता, कपडे, पैन, घडी, मोबाईल, पानी की बोतल, चाय, काँफी,अचार का डिब्बा,......यहाँ तक नमक भी इनमें अधिकाँश वस्तुऐं विदेशी होती है।
अभी भी वक्त है अगर अभी भी हमने ध्यान नहीं दिया तो भारत में आर्थिक गुलामी आ जायेगी। भारत की अर्थव्यवस्था विदेशी कम्पनियों की गुलाम बन जायेगी। कहीं ऎसा ना हो आने वाले समय में हमारी पीढी हमसे कहे जब विदेशी कम्पनियाँ देश लूट रही थी तब तुम क्या फेसबुक चला रहे थे।
आने वाली आर्थिक गुलामी से बचने का एक मात्र उपाय है स्वदेशी प्रचार।अपने जीवन में जितना सम्भव हो सके स्वदेशी वस्तुओं का प्रयोग कीजिये तभी राजीव भाई के सपनों के भारत का निर्माण हो सकता है।
स्वदेशी वस्तुओं की सूची
(1)  उत्पाद-टूथपेस्ट/दंतमंजन   
विदेशी-कोलगेट, हिन्दुस्तान लीवर (क्लोजअप, पेप्सोडेंट, ऐम, सिबाका), एक्वाफ्रेश, एम वे (फोरहन्स), ओरबली, क्वान्टम आदि।
स्वदेशी-कामधेनु काला दंतमंजन, दंतक्रान्ति, दंत मंजन (पतंजलि), मंजन एम.डी.एच.,विको बज्रदन्ती, वैद्यनाथ, गुरुकुल फार्मेसी, चॉइस, नीम, एंकर, मिस्वाक, बबूल, प्रोमिस आदि।
(2) उत्पाद- टूथब्रश
विदेशी- कोलगेट, क्लोजअप, पेप्सोडेन्ट, एक्वाफे्रश, सिबाका आदि।
स्वदेशी- प्रोमिस, अजय, अजन्ता, मोनेट, रोयल, क्लासिक, डॉ. स्ट्रॉक आदि।
(3) उत्पाद- नहाने का साबुन
विदेशी- हिन्दुस्तान लीवर, (लक्स,लिरिल, लाईफबॉय, लेसांस, डेनिम, केमे, डॉव, रेवलॉन, पियर्स, रेक्सोना, ब्रीज, हमाम, ओके) पॉण्डस, डिटोल, क्लियरसिल, पामोलिव, एमवे, जॉनसन बेबी आदि।
स्वदेशी- प्राकृतिक स्नान बटी, कायाकान्ति, कायाकान्ति एलोविरा(पतंजलि), निरमा, मेडीमिक्स, नीम, निमा, जेस्मीन, मैसूर, सेंदल, कुटीर, सहारा हिमानी, ग्लिसरीन, गोदरेज (सिंथोल, फेयरग्लो, शिकाकाई, गंगा) विप्रो, संतुन आदि।
(4) उत्पाद-शैम्पू
विदेशी- कोलगेट पामोलिव (हैलो पामोलिव), हिन्दुस्तान लीवर (लक्स, क्लिनिक, सनसिल्क, रेवलॉन, लेक्मे) प्रोक्टर एवं गेंबल (पेन्टीन, मेडीकेयर), पोण्डस, ओल्ड स्पाइस, शावर टू शावर, हेड एवं शोल्डर, जॉनसन बेबी आदि।
स्वदेशी- केशकांति (पतंजलि), विप्रो, पार्क अवेन्यु, स्वातिक अयुर हर्बल, केशनिखार, हेयर एण्ड,केयर, नाइसिल, अर्निका, वेलवेट, डाबर वाटिका, बजाज, नाईल, लेवेण्डर, गोदरेज आदि।
(5) उत्पाद- कपड़े व बर्तन धोने केसाबुन, वाउडर व नील
विदेशी- हिन्दुस्तान लीवर (सर्फ, रिन, सनलाइट, व्हील, ओके, विम) एरियल, चेक, हेन्को, रिविल, एमवे, क्वान्टम। ऊनी कपड़ों के लिए-वुलवाश, ईजी,। नील, रॉबिन ब्लू टीनापाल, स्काईलार्क आदि।
स्वदेशी- टाटा शुद्ध, निमा, मोदी, केयर, सहारा, स्वास्तिक, विमल, हिपोलीन, फेना, ससा, टीसीरिज, डॉ. डेट, घड़ी। ऊनी कपड़ों के लिए-जैटिल। नील-उजाला, रानीपाल, निरमा, चमको, डिप आदि।
(6) उत्पाद- शेविंग क्रीम
विदेशी- ओल्डस्पाइस, पामोलिव, पॉण्डस, जिलेट, इरास्मिक, डेनिम, यार्डले आदि।
स्वदेशी- पार्क अवेन्यु, प्रीमियम, वीजोन, इमामी, बलसारा, गोदरेज, निविया आदि।
(7) उत्पाद- शेविंग ब्लेड
विदेशी- जिलेट (7 ओक्लोक, इरास्मिक) विल्मैन, विल्टेज आदि।
स्वदेशी- टोपाज, गेलेन्ट, सुपरमेक्स, लेजर, एसक्वायर, सिल्वर प्रिन्स, प्रीमियम आदि।
(8) उत्पाद- क्रीम पाउडर व सौन्दर्य प्रसाधन की सामग्री
विदेशी- हिन्दुस्तान लीवर (फेयर एवं लवली, लेक्मे, लिरिल, डेनिम, रेवलोन), प्रोक्टर एवं गेम्बल, (आयल एवं ओले, क्लिरयसिल, क्लियरटोन), चार्मिस, पोण्डस, ओल्ड स्पाइस, डेटाल, नाइसिल, चार्ली, जॉनसन बेबी आदि।
स्वदेशी- कायाकांति ऐलोवेरा, कायाकांति, नीम, कांतिलेप (पतंजलि), बोरोसिल, अयुर इमामी, विको, बोरोप्लस, बोरोलीन, हिमानी,गोल्ड, नाईल, लेवेण्डर, हेयर एंड केयर, निविया, हेवन्स, सिंथोल, ग्लोरी, वेलवेट (बेबी) आदि।
(9) उत्पाद- रेडिमेड वस्त्र
विदेशी- रैंगलर, नाईक, ड्यूक, एडीडास, न्यूपोर्ट प्यूमा आदि।
स्वदेशी - केम्ब्रिज, पार्क अवेन्यु, ओक्जेम्बर्ग,बॉम्बे डॉइंग, रफ एंड टफ, ट्रिगर जिंस आदि।
(10) उत्पाद - घड़ी
विदेशी - राडो, रॉलैक्स, स्वीसको, सीको आदि।
स्वदेशी - टाइटन, एचएमटी, मैक्जिमा, पे्रस्टिज, अजन्ता।
(11) उत्पाद - पेन, पेन्सिल
विदेशी - पारकर, निकलसन, रोटोगेक, स्विसएयर,एडजेल, राइडर, मित्सुबिषी, फ्लेयर, यूनिबाल, पायलट,रोलगोल्ड आदि।
स्वदेशी - कैमल, किंग्सन, शार्प, सेलो, विल्सन,टुडे, नटराज, ऐम्बेसेडर, लिंक, मोन्टेक्स, स्टीक,संगीता, लक्सर, अप्सरा आदि।
(12) उत्पाद - कोल्ड ड्रिंक्स
विदेशी - कोका कोला (कोक, फैन्टा, स्प्राईट, थम्सअप,गोल्डपाट, लिम्का), पेप्सी (लहर, 7अप, मिरिंडा, स्लाइस) टीम, सिट्रा,क्रश, मेकडोवल।
स्वदेशी - गुलाब शर्बत, बादाम शर्बत (पतंजलि),दूध लस्सी, छाछ, जूस, नींबू पानी,नारियल पानी,शेक, ठंडाई, जलजीरा। रूहअफजा, रसना, फ्रूटी,गोदरेज, जंपईन आदि।
(13) उत्पाद - चाय व कॉफी
विदेशी - लिप्टन (टाईगर, ग्रीन लेबल, येलो लेबल,चीयर्स) ब्रुक बॉण्ड (रेड लेबल, ताजमहल), गोडफ्रेफिलिप्स, पोलसन, गुडरिक, सनराईज, कॉफी - नेस्ले,नेस्केपे, रिचबू।
स्वदेशी - चाय दिव्य पेय (पतंजलि),टाटा, ब्रह्मपुत्र,असम, गिरनार। कॉफी - इण्डियन कैफे, एम. आर.।
(14) उत्पाद - शिशु आहार व दूध पाउडर
विदेशी - नेस्ले (लेक्टोजन, सेरेलक, नेस्टम, एल.पी.एफ., मिल्क मेड, नेस्प्रे, एवरीडे, गाल्टको), ग्लेक्सो (फैरेक्स) आदि।
स्वदेशी - शहद, दालों का पानी, उबले चावल, फलों का रस।अमूल, इण्डाना, सागर, तपन, मिल्क, केयर आदि।
(15) उत्पाद - आइसक्रीम
विदेशी - वाल्स, क्वालिटी, डोलप्स, कैडबरी आदि।
स्वदेशी - घर की बनी आइसक्रीम, कुल्फी, अमुल, वाडीलाल, मिल्क फूडआदि।
(16) उत्पाद - नमक
विदेशी - अन्नपूर्णा, कैप्टन, कुक(हिन्दुस्तान लीवर), किसान (ब्रुकबाण्ड), पिल्सबरी आदि।
स्वदेशी - अंकुर नमक, सैंधा नमक (पतंजलि) लो सोडियम व आयरन-45, अंकुर, टाटा, सूर्या ताजा, तारा।
(17) उत्पाद - आलू चिप्स व नमकीन
विदेशी - अंकल, पेप्सी (रफल्स, हास्टेस), फनमंच आदि।
स्वदेशी - बीकानो नमकीन, हल्दीराम, घर में बनेचिप्स, बीकाजी एवं एवन आदि।
(18) उत्पाद - टमाटर सॉस, फ्रूट जैस
विदेशी - नेस्ले, ब्रुक बॉण्ड, (किसान), ब्राउन एंड पालसन आदि।
स्वदेशी - फ्रूट जैम, एपल जैस, मिक्स जैम, (पतंजलि) घर में बना सॉस। इण्डाना, प्रिया, रसना आदि।
(19) उत्पाद - बिस्कुट / चॉकलेट
विदेशी -कैडबरी (बोर्नविटा, 5 स्टार) लिप्टन, हार्लिक्स, न्यूट्रीन, इक्लेयर्स आदि।
स्वदेशी - गुड़ मुंगफली, बादाम ज्यादा स्वास्थ्यप्रद है। आंवला, कैन्डी, बेल कैन्डी, बिस्किट, कैंडी (पतंजलि)। ब्रिटानिया, पारले, बेकमेन्स, क्रीमिका, शाग्रिला, इन्डाना, अमूल, रावलगांव आदि।
(20) उत्पाद - पानी
विदेशी - एक्वाफिना, किनले, बैली, प्यारे-लाईफ, इवियन, सैन-पैलेग्रीमों, पैरियर आदि।
स्वदेशी - घर  का उबला साफ पानी, गंगा, हिमालया, कैच, रेल-नीर, बिसलरी आदि।
(21) उत्पाद - टॉनिक
विदेशी - बूस्ट, पोलसन, बोर्नवीटा, होर्लिक्स, कॉम्पलान,स्पर्ट, प्रोटिनेक्स।
स्वदेशी - बादाम पाक, च्यवनप्राश,अमृत रसायन (पतंजलि), न्यूट्रामूल, माल्टोवा।
(22) उत्पाद - घी एवं खाघ तेल
विदेशी - नेस्ले का घी, डालडा, आई.टी.सी. व हिन्दुस्तान लीवर के सभी ब्राण्ड।
स्वदेशी - घर का गाँव का घी, परम घी, अमूल घी, गाय का देशी घी, सरसों का तेल (पतंजलि)
यह सूची गायत्री परिवार की वेब साईट से ली गई है।
आप स्वदेशी वस्तुओं की लिस्ट की एक्सल फाइल यहाँ से डाउन लोड कर सकते है।
जितना हो सके इसका प्रिंट निकाल कर अपने मित्रों में बाँटे।
नोट:-   
1. यघपि सूची प्रकाशन में पर्याप्त सावधानी रखी गई है तथापि किसी भी नवीन जानकारी से हमें अवश्य अवगत करवाएं जिससे आगामी संस्करण में आवश्यक संशोधन किये जा सकें।
2. आप जहां भी रहते हैं, उसके आसपास ग्रामीणों एवं लघु उघमियों द्वारा आपके दैनिक प्रयोग की कई वस्तुएं बनाई जाती हैं। आप प्राथमिकता के आधार पर उनका प्रयोग कर गांव को स्वावलम्बी बनाएं।

Popular Posts